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Friday, September 24, 2010

कोई मेरी सुनो...................





मैं पोस्ट बॉक्स हूँ,वही लाल काला डिब्बा जिसे देख बच्चे खुश हो जाया करते थे,मेरी दुनियाँ पीले नीले कागजों से सजी रहती थी जो आज वीरान सी पड़ी है,आज मुझे कुछ कहना है ,कल जो मैं सबके लिए इतना मायेने रखता था आज बेमाने हो गया हूँ ,मेरा वजूद न जाने  कहाँ खो सा गया है,सड़क किनारे मैं मौन सा खड़ा ,किसी के ख़त का इंतज़ार करता रहता हूँ कि शायद आज किसी भूले भटके को मेरी भी सुध आ जाये ,इस इन्टरनेट कि चमकीली दुनियाँ में,मेरे होने का तो जैसे आज किसी को अहसास ही नहीं,मेरे ना होने से किसी कोई शिकायत नहीं ,कल तक मैं ही था जो सबके संदेशे भेजा करता  था ,आज मेरे डाकिये का भी मुझे पता नहीं मिलता, मुझपे लगा ताला जो रोज़ खुला करता था आज ,कई कई दिनों तक उसे कोई नहीं खोलता ,मेरी जगह आज हाई स्पीड मेल सर्विस ने ले ली है कुछ मिनटों में ही संदेसा पहुँच जाता है,अब कौन करता है डाकिये का इंतज़ार,कौन देखता है राह कि आयेगा किसी प्रियजन का ख़त.मुझे भी लगता है कि मैं शायद फिर से कभी लोगों को याद आऊँगा ,उस पल मैं खुद को सबसे खुशनसीब पाउँगा,पर कोई मेरी सुनता ही नहीं ,मैं भी चाहता हूँ कि कोई मेरी भी सुने.

10 comments:

  1. चिन्ता की यह बात यहाँ उठा जो प्रश्न।
    इन्टरनेट मोबाइल पर सुमन मनाते जश्न।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  2. बहुत अच्छी पोस्ट लगी धन्यवाद|

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  3. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  4. हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  5. great expression of letter box. it indicates potential to u

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  6. अलग सोच - जो सही मायने मैं लेखन को सार्थक बनाती है - शुभकामनाएं

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  7. Nice piece of writing .. keep it up

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