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Tuesday, August 10, 2010

जब ज़िन्दगी ने साथ छोड़ा ,तब मौत का आना हुआ ,दुनिया की नज़र में ये हमारा गुज़र जाना हुआ ,
उन्हें क्या मालूम पूरे तो हम कभी आये ही न थे,जब आये ही नहीं तो कैसा यह जाना हुआ ,
दो वाक्क्त जो ठहरे क्या गुनाह किया हमने ,ये की बस एक सुबह एक शाम ही देखी हमने,
कुछ और जो ठहर जाते जहाँ से इश्क हो जाता ,इन्हीं फलसफों से कल अपना आज बेगाना हुआ,
जब तक रहीं साँसें हम मशहूर ही रहे ,ये हमपे इनयात ही कही जाएगी जो स दर्द भरी ज़िन्दगी से उसका हमें बुलना हुआ!!!!!!!


मेरी रूह को जिस्म की कैद न देना ,

बड़ी रो रो कर काटी है जिंदगी मैंने!!!!!!!!!!!!!!!

1 comment:

  1. Bahut achche... last lines bahut khoob kahi, jindagi ka naksha kheech diya.. bahut khoob

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