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Tuesday, August 10, 2010

इसके एक एक शेर पे इलज़ाम है ,ये ग़ज़ल मेरी बहुत बदनाम है ,
हर तरफ मौत का पैगाम है, जिंदगी यहाँ तेरा क्या 
काम है,
तय न तक पाया ज़माना आज तक जिसे ,जिंदगी उस फलसफे का नाम है,
जिनका कल आगाज़ से कुछ रिश्ता भी न था ,उनके हाथों में आज  अंजाम है,
तोड लेना फूल को मुश्किल काम नहीं, सोचते रहिये ग़र तो मुश्किल काम है,
मौत क्या है रस्ते का इक पड़ाव जिंदगी अगले सफ़र का 
नाम है!!!!!!!!!!!! 

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